खराब जीवनशैली से बढ़ता है कोलन कैंसर का खतरा, इन 6 लक्षणों से समय रहते पहचानें…

WhatsApp Group Join Now

कोलन कैंसर के लक्षण: कोलन कैंसर बड़ी आंत में होने वाला एक कैंसर है, जिसका समय पर इलाज न होने पर मृत्यु भी हो सकती है।

हालांकि, लोग अक्सर इसके लक्षणों (कोलन कैंसर के लक्षण) को पेट की एक सामान्य समस्या समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसलिए, अक्सर इसकी पहचान में देर हो जाती है।

इसलिए, कोलन कैंसर के लक्षणों के बारे में जानना ज़रूरी है, ताकि जल्द से जल्द इसकी पहचान और इलाज किया जा सके। आइए जानते हैं कि कोलन कैंसर के लक्षण (कोलन कैंसर के चेतावनी संकेत) क्या हैं और इसके जोखिम कारक क्या हैं।

कोलन कैंसर के लक्षण क्या हैं?

मल त्याग में बदलाव – कोलन कैंसर का सबसे आम लक्षण मल त्याग की आदतों में बदलाव है। इसमें दस्त, कब्ज या मल के रंग में बदलाव शामिल हो सकते हैं। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।

मल में खून आना – मल में खून आना कोलन कैंसर का एक महत्वपूर्ण लक्षण है। रक्त का रंग गहरा लाल या काला हो सकता है। हालाँकि बवासीर या दरारें भी रक्तस्राव का कारण बन सकती हैं, लेकिन इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

पेट में दर्द या ऐंठन – लगातार पेट दर्द, गैस, सूजन या ऐंठन कोलन कैंसर का लक्षण हो सकता है। अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के दर्द बना रहता है, तो जाँच करवाना ज़रूरी है।

वज़न कम होना – बिना किसी प्रयास के अचानक वज़न कम होना कोलन कैंसर का एक चेतावनी संकेत हो सकता है। यह कैंसर के कारण शरीर में होने वाले चयापचय परिवर्तनों के कारण होता है।

थकान और कमज़ोरी – कोलन कैंसर में, मल में रक्तस्राव अक्सर शरीर में आयरन की कमी का कारण बनता है, जिससे थकान, चक्कर आना और कमज़ोरी होती है।

मल त्याग पूरी तरह न होने का अनुभव – कुछ रोगियों को मल त्याग के बाद भी पेट साफ़ नहीं होने का अनुभव होता है। इस स्थिति को टेनेसमस कहा जाता है और यह कोलन या मलाशय में ट्यूमर के कारण हो सकता है।

कोलन कैंसर के जोखिम कारक क्या हैं?

आयु – कोलन कैंसर के ज़्यादातर मामले 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में होते हैं। हालाँकि, युवाओं में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं।

पारिवारिक इतिहास: अगर परिवार में किसी को कोलन कैंसर या पॉलीप्स का इतिहास रहा है, तो जोखिम बढ़ जाता है।

खराब जीवनशैली – रेड मीट, प्रोसेस्ड फ़ूड और कम फाइबर वाला आहार कोलन कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। धूम्रपान और शराब भी जोखिम को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, जो लोग व्यायाम नहीं करते हैं, उनमें भी जोखिम अधिक होता है।
मोटापा – मोटापा और मधुमेह कोलन कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक हैं।

सूजन आंत्र रोग (आईबीडी) – क्रोहन रोग या अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी बीमारियों से ग्रस्त लोगों में कोलन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।

WhatsApp Group Join Now

Leave a Comment