हमारे आस-पास कई औषधीय पौधे हैं जिनका उपयोग हम अपने दैनिक जीवन में बीमारियों से राहत पाने के लिए कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है अरंडी का पौधा, इसके पत्ते और तेल दोनों ही स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।
इसका उपयोग सदियों से आयुर्वेद और देशी उपचारों में किया जाता रहा है। अरंडी का पौधा एक मध्यम ऊँचाई वाली झाड़ी होती है जिसके पत्ते लंबे, चौड़े और पंजे जैसे होते हैं। पत्तियों का रंग गहरा हरा या हल्का बैंगनी हो सकता है। यह पौधा दिखने में साधारण है, लेकिन इसके अंदर औषधियों का खजाना छिपा है।
अरंडी के पौधे की खेती की जाती है
अरंडी का पौधा पूरे भारत में पाया जाता है। यह गर्म और शुष्क क्षेत्रों में बेहतर ढंग से उगता है। यह खेतों के किनारे, गाँवों के किनारे, बगीचों या खुले स्थानों में भी अपने आप उगता है। इसकी व्यापक रूप से खेती की जाती है क्योंकि इसके बीजों से निकलने वाला तेल बहुत मूल्यवान होता है।
बिना किसी कारण के इसका इस्तेमाल शुरू न करें।
जिन लोगों को घुटनों, पीठ या कमर के जोड़ों में दर्द रहता है, उनके लिए अरंडी के पत्ते बहुत फायदेमंद होते हैं। अरंडी के पत्तों पर सरसों या तिल का तेल लगाकर उसे गर्म करके दर्द वाली जगह पर बाँध लें। इससे सूजन और दर्द से बहुत आराम मिलता है।
कई बुजुर्ग आज भी इस उपाय को आजमाते हैं। अरंडी के बीजों से निकला तेल बालों की जड़ों को मजबूत करता है। इसे रात में बालों में लगाने और सुबह धोने से बाल काले, घने और मजबूत बनते हैं।
बाजार में मिलने वाला अरंडी का तेल इसी अरंडी के बीजों से बनाया जाता है। हालाँकि अरंडी का तेल बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल किसी वैद्य या आयुष चिकित्सक की सलाह से ही करें।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।
