चाय में ये 3 चीजें मिलाने से शरीर हो सकता है खराब, चाय के साथ क्या न खाएं? यहां जानें…

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हम अक्सर चाय बनाने में ऐसी चीज़ें डाल देते हैं, जो शरीर के लिए अच्छी नहीं होतीं। इससे एसिडिटी, गैस, डायबिटीज़ का ख़तरा बढ़ जाता है। अगर आप इनसे बचना चाहते हैं, तो डॉक्टर की इस चेतावनी को मान लीजिए।

भारत में लाखों लोग चाय के दीवाने हैं। यह लोगों को नींद से जगाने, ऊर्जा देने और तरोताज़ा करने का काम करती है। भारतीयों के लिए यह एक जादुई सुबह का पेय है। इसका रंग, खुशबू और स्वाद इतना तीखा होता है कि लोग तपती गर्मी में भी कहते हैं – ‘एक कप चाय’।

इसे पीने के कई कारण हैं और एक आश्चर्यजनक कारण यह है कि लोग समय बिताने के लिए भी चाय पीते हैं। जिसके कारण दिन भर में कई कप चाय पी जाते हैं। घरों में रोज़ाना चाय बनती है, लेकिन फिर भी 99 प्रतिशत लोग इसमें गलत चीज़ें डाल रहे हैं। जो स्वाद तो देती हैं, लेकिन शरीर को अंदर से ख़राब करती हैं।

इसके सेवन से डायबिटीज़ का ख़तरा भी बढ़ जाता है। इसे आयुर्वेदिक विरोधी आहार माना जाता है। क्योंकि ये तीनों चीज़ें मिलकर अच्छे परिणाम नहीं देतीं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. रॉबिन शर्मा इस बारे में जानकारी दे रहे हैं।

चाय बनाते समय 3 चीज़ें न डालें

चाय में 3 चीज़ें डालने से शरीर को नुकसान पहुँचता है। इसमें दूध और चीनी डाली जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी से दुश्मनी हो, तो ही ऐसी चाय पिलानी चाहिए। कुछ लोग चीनी की जगह गुड़ डालते हैं, लेकिन यह चीज़ भी अच्छे परिणाम नहीं देती।

मधुमेह का ख़तरा

रोज़ाना कई कप चाय पीने से शुगर लेवल बढ़ जाता है। लंबे समय में यह ब्लड ग्लूकोज़ बढ़ा देता है। जिससे धीरे-धीरे मधुमेह का ख़तरा सिर पर मंडराने लगता है। जिन लोगों के परिवार में इस बीमारी का इतिहास रहा है, उन्हें इससे बचना चाहिए।

चाय के साथ क्या नहीं खाना चाहिए?

खाली पेट चाय पीना भी शरीर के लिए सेहतमंद होता है। इससे गैस-एसिडिटी हो सकती है। लेकिन ऐसी खतरनाक चाय के साथ-साथ नमकीन, समोसे, चाट-पकौड़े भी होते हैं। अगर आप इनका सेवन करते हैं, तो तुरंत बंद कर दें।

चाय पीने के कई फायदे

मिल सकते हैं, लेकिन तभी जब आप इसे सही तरीके से बनाएँ। आप चाय की पत्तियों की जगह कुछ बीएस जड़ी-बूटियाँ भी डाल सकते हैं। इनमें गुड़हल, अदरक, कैमोमाइल, पुदीना सबसे लोकप्रिय हैं।

जड़ी-बूटियाँ रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करती हैं। इससे मधुमेह, हृदय रोग, पुरानी सूजन और कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा कम होता है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।

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