चाय और बच्चों का स्वास्थ्य: भारत में चाय सिर्फ़ एक पेय नहीं, बल्कि दिन की शुरुआत का एक अहम हिस्सा है। कई घरों में माता-पिता सुबह-शाम खुद के साथ-साथ बच्चों को भी चाय पिलाते हैं। लेकिन क्या यह आदत सही है? क्या बच्चों को चाय देना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है?
इस सवाल का जवाब देते हुए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल अग्रवाल ने एक ज़रूरी सलाह दी है। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने बच्चों पर चाय पीने के स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में चेतावनी दी है।
बच्चों को चाय देना क्यों खतरनाक है?
डॉ. अग्रवाल कहते हैं कि छोटे बच्चों का वज़न कम होता है और उनकी पाचन क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती।
“बच्चा स्नैक्स या बिस्कुट तो खाएगा, लेकिन असली खाना नहीं, जिससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।” – डॉ. अग्रवाल
क्या समस्याएँ हो सकती हैं?
पोषक तत्वों की कमी: चाय पीने से बच्चों को पूरा भोजन नहीं मिल पाता, जिससे शरीर में ज़रूरी विटामिन और खनिजों की कमी हो सकती है।
कम वज़न और एनीमिया: लंबे समय तक पौष्टिक आहार न मिलने से बच्चे का वज़न कम हो सकता है और एनीमिया हो सकता है।
बार-बार बीमार पड़ना: कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण बच्चे अक्सर बीमार पड़ जाते हैं।
निर्जलीकरण का ख़तरा: चाय में मौजूद कैफीन निर्जलीकरण का कारण बन सकता है।
नींद में खलल: यह बच्चों की नींद पर भी बुरा असर डालता है।
चाय की लत: जिस तरह बड़ों को चाय की लत लग जाती है, उसी तरह बच्चों को भी धीरे-धीरे इसकी लत लग सकती है।
माता-पिता को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को चाय की बजाय दूध, फल, सूखे मेवे और घर का बना खाना युक्त पौष्टिक नाश्ता देना चाहिए। अगर आप कोई आदत डालना चाहते हैं, तो उसे एक स्वस्थ आदत बनाएँ – जैसे ताज़ा फलों का रस या नारियल पानी।
बच्चों को चाय देना भले ही एक आम आदत बन गई हो, लेकिन यह आदत गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि बच्चों को कम से कम 12-14 साल की उम्र से पहले कैफीन युक्त उत्पादों से दूर रखना चाहिए।
माता-पिता के लिए चेतावनी: बच्चों को स्वस्थ रखना आपकी ज़िम्मेदारी है – एक कप चाय की तुलना में पोषण से भरपूर एक कटोरी ज़्यादा प्रभावी है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी शैक्षिक और सामान्य उद्देश्यों के लिए है। केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।
