किस विटामिन की कमी से आती है ज़्यादा नींद? इन चीज़ों को खाने से शरीर को मिलेगी एनर्जी, आलस्य से मिलेगा छुटकारा…

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क्या आपको रात में 7-8 घंटे सोने के बाद सुबह थकान, नींद या सुस्ती महसूस होती है? अगर हाँ, तो यह शरीर में ज़रूरी विटामिन की कमी के कारण हो सकता है।

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोग अपने खान-पान पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे पाते, जिससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। शरीर में ऊर्जा की कमी होने लगती है और शरीर सुस्ती से घिर जाता है।

खासकर कुछ विटामिनों की कमी के कारण शरीर सुस्त और नींद महसूस करता है। आइए जानें कि किस विटामिन की कमी से ऐसा होता है और कौन से खाद्य पदार्थ खाने से शरीर ऊर्जा से भरपूर रहेगा।

इन दो विटामिनों की कमी से नींद ज़्यादा आती है।

हेल्थलाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक नींद आने या थकान का एक मुख्य कारण शरीर में विटामिन डी और विटामिन बी12 की कमी हो सकती है। ये दोनों विटामिन शरीर की ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विटामिन डी क्यों ज़रूरी है?

रिपोर्ट के अनुसार, विटामिन डी मांसपेशियों की मज़बूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए ज़रूरी है। इसके अलावा, विटामिन डी की कमी का असर मूड पर भी साफ़ देखा जा सकता है। शरीर में इस विटामिन की कमी से व्यक्ति हमेशा थका हुआ और कमज़ोर महसूस करता है।

विटामिन बी12 क्यों ज़रूरी है?

वहीं, एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, शरीर में विटामिन बी12 की कमी से मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे शरीर हमेशा थका हुआ और सुस्त महसूस करता है। या हमेशा नींद और सुस्ती महसूस होती है।

विटामिन डी की कमी कैसे दूर करें?

विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए आप अपने आहार में मछली, मशरूम, डेयरी उत्पाद, अंडे और साबुत अनाज शामिल कर सकते हैं। ये सभी चीज़ें शरीर में प्राकृतिक रूप से विटामिन डी बढ़ाने में मदद करती हैं।

विटामिन बी12 की कमी दूर करने के लिए क्या खाएं?

अंडे विटामिन बी12 का एक बेहतरीन स्रोत हैं। विटामिन बी12 विशेष रूप से पीले अंडे की जर्दी में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा, आप शरीर में विटामिन बी12 बढ़ाने के लिए दूध, दही, सोया उत्पाद, मछली और न्यूट्रिशनल यीस्ट खा सकते हैं।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।

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