पेट का अल्सर एक ऐसी समस्या है जो पेट की अंदरूनी परत में चोट लगने पर होती है। ये घाव दर्दनाक होते हैं और खाने के बाद या भूख लगने पर ज़्यादा महसूस होते हैं। पेट के अल्सर के कई कारण हो सकते हैं, जैसे हेलिकोबैक्टर नामक बैक्टीरिया, गलत खान-पान, नशीली दवाओं का अत्यधिक सेवन, तनाव, धूम्रपान और शराब का सेवन।
यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन वयस्कों में यह सबसे आम है। अगर समय रहते इसका सही इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकती है और काफी परेशानी का कारण बन सकती है।
पेट के अल्सर का सबसे आम लक्षण पेट के ऊपरी हिस्से में जलन या दर्द होना है, खासकर खाली पेट या रात में। खून की उल्टी या मल में खून आना भी इसका कारण हो सकता है। अगर पेट का अल्सर लंबे समय तक बना रहे, तो मरीज को बाद में इलाज कराने में दिक्कत होती है।
इस समस्या में मरीज को अक्सर पेट में दर्द और सूजन महसूस होती है। इस दौरान मरीज को कुछ भी खाने-पीने का मन नहीं करता। कुछ लोगों को पेट फूलने या गैस की समस्या हो सकती है। मरीज को पेट फूलने की समस्या होने लगती है और कुछ भी खाने का मन नहीं करता।
कुछ लोगों को भूख कम लगना या वज़न कम होने का अनुभव हो सकता है। पेट में घाव होने पर रोगी कुछ भी खाने का मन नहीं करता। रोगी दिन-रात भूखा रहना पसंद करता है। धीरे-धीरे रोगी कमज़ोर होने लगता है, जिसका असर उसके चेहरे पर दिखाई देने लगता है।
गंभीर मामलों में, मल का रंग गहरा या काला हो सकता है। कई बार रोगी को मल त्याग के दौरान खून आने लगता है। इस दौरान भी रोगी को पेट में ऐंठन और दर्द महसूस होता है। दर्द के कारण कुछ लोगों की रात में नींद खराब हो सकती है। तेज़ दर्द के कारण रोगी सो नहीं पाता। रोगी रात भर दर्द से कराहता रहता है।
पेट के अल्सर को नियंत्रित करने के कुछ आसान उपाय हैं। सबसे पहले, स्वस्थ आहार लेना ज़रूरी है। तले, मसालेदार और खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें और हल्का व आसानी से पचने वाला भोजन करें। इसके अलावा, तनाव से बचने के लिए योग और ध्यान फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
अगर डॉक्टर ने दवाइयाँ दी हैं, तो उन्हें सही समय पर और नियमित रूप से लें। धूम्रपान और शराब से बचना भी बहुत ज़रूरी है, क्योंकि ये पेट के अल्सर को बढ़ा सकते हैं। हल्का व्यायाम भी पेट को बेहतर बनाने में मदद करता है। स्वास्थ्य।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।
