लकवा का दौरा आते ही कर लें ये एक उपाय तो शरीर को छू भी नहीं पाएगी बीमारी… बच जाएगी जान!

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लकवा एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर के किसी अंग या पूरे शरीर को हिलाने-डुलाने की क्षमता अस्थायी या स्थायी रूप से समाप्त हो जाती है। यह आमतौर पर मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रुकने, तंत्रिका संपीड़न या चोट लगने के कारण होता है। अगर अचानक स्ट्रोक आ जाए, तो तुरंत कुछ उपाय करके आप स्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं और बड़ी समस्याओं से बच सकते हैं।

लकवा होने पर तुरंत ये कदम उठाएँ:

(1) तुरंत 911 (या आपातकालीन नंबर) पर कॉल करें: स्ट्रोक होने पर, पहला कदम डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना है। अपने नज़दीकी आपातकालीन नंबर पर कॉल करें और जल्द से जल्द मदद पाने की कोशिश करें।

(2) तुरंत सिर सीधा करें: लकवा का दौरा पड़ने पर व्यक्ति का सिर सीधा और आराम की स्थिति में रखें। सिर को झुकाने या खड़ा करने से बचें, क्योंकि इससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
(3) पानी न पिएँ: लकवाग्रस्त व्यक्ति को पानी, भोजन या कोई अन्य तरल पदार्थ न दें, क्योंकि यह उसके गले में अटक सकता है और घातक हो सकता है।
(4) मालिश और प्राणायाम: अगर आप लकवा से बचना चाहते हैं, तो नियमित रूप से सिर, गर्दन और हाथों की हल्की मालिश करें। साथ ही, प्राणायाम ( योग) रक्त संचार में सुधार करता है और स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है।
(5) अग्रभाग को आराम दें: शरीर के किसी एक हिस्से में अचानक लकवा और कमज़ोरी आने पर, उस हिस्से को आराम देना ज़रूरी है। जैसे ही आपको शरीर के किसी हिस्से में कमज़ोरी महसूस हो, उस हिस्से को धीरे से सहारा दें ताकि वह अकड़ न जाए।
(6) स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानें: लकवा और स्ट्रोक के लक्षण लगभग एक जैसे हो सकते हैं। स्ट्रोक का एक सामान्य लक्षण चेहरे का अचानक कंपन, धुंधली दृष्टि या बोलने में कठिनाई हो सकता है। इन लक्षणों को पहचानना और तुरंत इलाज करवाना ज़रूरी है।
(7) हल्का आहार लें: व्यक्ति को हल्का और सुपाच्य भोजन, जैसे दालें, सूप या तरल आहार देना चाहिए, ताकि उसका पाचन सामान्य रहे और शरीर भारी न लगे।
(8) आयुर्वेदिक उपचार और हर्बल उपचार:
  • आँवला-आयुर्वेद में आँवला को बहुत लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह शरीर के तंत्रिका तंत्र को मज़बूत बनाता है और रक्त प्रवाह में सुधार करता है।
  • हल्दी – हल्दी में सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो शरीर के तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
  • ब्राह्मी – ब्राह्मी तंत्रिका तंत्र के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। यह मन को शांत करती है और लकवा के खतरे को कम करती है।
  • ध्यान और योग – मन की शांति के लिए ध्यान और योग का अभ्यास करें। इसका तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • अश्वगंधा – यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी शरीर को शक्ति और ऊर्जा प्रदान करती है, जो लकवा जैसी स्थितियों में मददगार हो सकती है।
(10) समय पर उपचार: लकवा का सबसे अच्छा इलाज समय पर उपचार है। अगर आपको या आपके आस-पास किसी को लकवा होने का खतरा महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और उचित जाँच करवाएँ। समय पर उपचार लकवा के प्रभाव को कम कर सकता है।
लकवा एक गंभीर और खतरनाक स्थिति हो सकती है, लेकिन समय पर उपाय करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि स्ट्रोक होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें और इसे गंभीरता से लें। इसके अलावा, नियमित योग, प्राणायाम, उचित आहार और जीवनशैली से लकवा जैसी स्थितियों से बचा जा सकता है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।
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