शोध: कैंसर और अल्ज़ाइमर जैसी गंभीर बीमारियों के निदान के लिए दुनिया भर में बायोप्सी का इस्तेमाल किया जाता है। हालाँकि, पारंपरिक बायोप्सी विधि दर्दनाक और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है। अक्सर मरीज़ इस प्रक्रिया से डरते हैं और अगर समय पर जाँच न करवाई जाए तो घातक परिणाम भुगतने पड़ते हैं। लेकिन अब इस स्थिति में बदलाव की उम्मीद है।
नया आविष्कार: दर्द रहित “नैनो पैच” किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है – एक ऐसा पैच जो बिना बायोप्सी के शरीर से आणविक जानकारी निकाल सकता है। खास बात यह है कि यह पैच ऊतकों को हटाए या नुकसान पहुँचाए बिना काम करता है और मरीज़ को कोई दर्द नहीं होता।यह कैसे काम करता है?यह पैच लाखों नैनो सुइयों से बना है जो बेहद पतली हैं – मानव बाल से भी पतली। इसे त्वचा पर लगाने से ऊतकों से आवश्यक जानकारी एकत्रित होती है।इस विधि के लाभ:
दर्द रहित और तेज़
वास्तविक समय डेटा प्रदान करता है
मस्तिष्क कैंसर और अल्जाइमर जैसी बीमारियों की अधिक सटीकता से पहचान की जाती है
प्रत्येक रोगी के लिए व्यक्तिगत उपचार संभव हो जाता है
एक ही ऊतक से बार-बार परीक्षण संभव है
AI तकनीक से एकीकृत इस पैच का उपयोग एंडोस्कोप, बैंडेज या कॉन्टैक्ट लेंस जैसे आधुनिक उपकरणों के साथ किया जा सकता है। AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की मदद से, यह पैच डेटा का त्वरित विश्लेषण करता है और डॉक्टरों को तुरंत परिणाम प्रदान करता है। यह नई खोज डॉक्टरों के लिए सर्जरी के दौरान भी अधिक सटीक और तेज़ निर्णय लेने में एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकती है।वैज्ञानिकों का 12 वर्षों का कार्य इस शोध का नेतृत्व डॉ. सिरो चियापिनो कर रहे हैं, जिन्होंने पिछले 12 वर्षों से नैनोनीडल्स का अध्ययन किया है। वे कहते हैं, “यह खोज व्यक्तिगत चिकित्सा और वास्तविक समय निदान के लिए क्रांतिकारी है।”प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशितयह खोज वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर नैनोटेक्नोलॉजी’ में प्रकाशित हुई है और भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के निदान और उपचार में बड़ा बदलाव ला सकती है।यह पैच तकनीक बायोप्सी जैसी दर्दनाक प्रक्रियाओं का विकल्प बन सकती है। अब कैंसर या अल्जाइमर जैसी बीमारियों का निदान मरीज़ के लिए आसान, तेज़ और अधिक आरामदायक हो जाएगा।