दवा की कीमत तय: जब कोई बीमारी दस्तक देती है, तो इलाज की चिंता के साथ-साथ दवा का खर्च भी जेब पर बोझ बन जाता है।
खासकर कैंसर, मधुमेह या जानलेवा संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयाँ आम आदमी की पहुँच से बाहर हो जाती हैं। लेकिन अब केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
आपको बता दें कि मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर, एलर्जी, मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाइयाँ अब आपको सस्ती दरों पर मिलने वाली हैं। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, अब जीएसटी तभी जोड़ा जा सकेगा जब इसका भुगतान सरकार को किया जाएगा।
इन दवाओं में रिलायंस लाइफ साइंसेज की ट्रैस्टुजुमैब भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर और गैस्ट्रिक कैंसर के इलाज में किया जाता है। अब इसकी कीमत ₹11,966 प्रति शीशी है।
बाकी दवाओं की कीमत क्या है?
इसके अलावा, जानलेवा संक्रमणों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सेफ्ट्रिएक्सोन, डिसोडियम एडिटेट और सल्बैक्टम पाउडर की कीमत 626 रुपये तय की गई है, जबकि कॉम्बिपैक की कीमत 515 रुपये तय की गई है।
एनपीपीए ने अपनी नई अधिसूचना में 25 मधुमेह-रोधी दवाओं की कीमतें भी अधिसूचित की हैं, जिनमें सिटाग्लिप्टिन एक प्रमुख घटक के रूप में शामिल है। इसके अलावा, एम्पाग्लिफ्लोज़िन संयोजन वाली कई अन्य मधुमेह की दवाएं भी इस सूची में शामिल हैं।
पारदर्शिता लाने की दिशा में सरकार
यह कदम मरीजों को महंगी दवाओं से राहत दिलाने और पारदर्शिता लाने के लिए उठाया जा रहा है। कुछ समय पहले, एनपीपीए ने एक आदेश जारी कर कहा था कि सभी दवा निर्माता अपने उत्पादों की कीमतों की सूची डीलरों, राज्य दवा नियामकों और सरकार को भेजें और यह उल्लेख करें कि सरकार की किसी अधिसूचना या आदेश के तहत कीमत तय या संशोधित की गई है।
यह फैसला न केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए एक बड़ी राहत है, बल्कि दवा उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा देगा।
अब लोगों को दवाइयाँ खरीदते समय यह जानने का अधिकार होगा कि क्या वे दवाइयाँ उचित और निश्चित मूल्य पर उपलब्ध हैं। सरकार का यह कदम स्वास्थ्य के अधिकार की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है।
