गर्मी अपने साथ धूप, गर्मी और बीमारियाँ भी लेकर आती है। गर्मियों में पेट की बीमारियाँ आम हैं, जैसे गैस, दस्त और उल्टी। दस्त गर्मियों में सबसे आम समस्या है। इसमें व्यक्ति बार-बार मल त्याग करता है, वह भी पतला। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकता है। अत्यधिक गर्मी पाचन क्रिया को बिगाड़ देती है, जिससे पेट खराब हो जाता है। जब आपका पाचन तंत्र खराब होता है, तो आपकी पूरी दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो जाती है क्योंकि आपका आधा समय शौचालय में ही बीतता है। आइए जानते हैं इस बीमारी के कारण, लक्षण और बचाव।
दस्त के कारण
1. चैप गर्मियों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। पसीने में बैक्टीरिया और वायरस पनपते हैं, जो शरीर में प्रवेश करने पर दस्त का कारण बन सकते हैं।
2. दूषित भोजन और पानी गर्मियों में अक्सर साफ़ पानी की कमी हो जाती है। साथ ही, अगर आप इस मौसम में बाहर का तला-भुना खाना खाते हैं, तो पेट का pH भी बिगड़ जाता है। इन दो कारणों से दस्त की समस्या होती है।
3. पाचन तंत्र की गड़बड़ी या खाद्य एलर्जी गर्मियों में तापमान बढ़ जाता है। अगर पानी ठीक से न पिया जाए तो पाचन क्रिया प्रभावित होती है। पानी की कमी से दस्त भी हो सकते हैं।
4. बहुत ज़्यादा तला हुआ या मसालेदार खाना खाना इस मौसम में बाहर का खाना हमारे पाचन के लिए अच्छा नहीं होता। कहा जाता है कि गर्मियों में हमें हल्का और पेट के लिए अच्छा खाना चाहिए, लेकिन लोग इतना ज़्यादा मसालेदार खाना खा लेते हैं कि उन्हें दस्त और उल्टी जैसी समस्याएँ हो जाती हैं।
5. तनाव या चिंता तनाव भी दस्त का एक कारण है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसिक स्वास्थ्य अच्छा है, तो पेट का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। बहुत ज़्यादा तनाव में रहने से हमारा पाचन तंत्र प्रभावित होता है।
प्रारंभिक लक्षण
- बार-बार पतला मल आना।
- पेट में दर्द या ऐंठन।
- बुखार।
- उल्टी।
- शरीर में कमज़ोरी या चक्कर आना।
निर्जलीकरण के लक्षण दस्त के बाद शरीर से पानी की कमी हो जाती है, जिसके कारण निर्जलीकरण की समस्या आम है। अगर आप निर्जलित हैं, तो आपको मुँह सूखने और पेशाब कम आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? मेदांता लखनऊ के सहायक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सलाहकार डॉ. आलोक कुमार सिंह बताते हैं कि गर्मियों में लू और धूप से बचना ज़रूरी है।
जो लोग दिन में लंबे समय तक बाहर रहते हैं, उनके शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है। इससे पाचन संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। अगर दस्त शुरुआती चरण में हैं, तो इसे घर पर ही ठीक किया जा सकता है।
घरेलू उपचार
- ओआरएस का घोल पिएँ – शरीर में पानी और नमक की पूर्ति करता है।
- दही या छाछ में अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं।
- चावल का पानी, साबुत दाल का पानी – हल्का और पचने में आसान।
- पके केले और सेब – दस्त को नियंत्रित करते हैं।
- अदरक का पानी या सौंफ का पानी – पेट को आराम देता है।
क्या न खाएं?
- तला हुआ, मसालेदार खाना।
- दूध या भारी चीज़ें।
- कैफीन, कोल्ड ड्रिंक्स।
- विदेशी या बासी खाना न खाएं।
डॉक्टर से कब मिलें?
- यदि दस्त 2-3 दिनों से ज़्यादा समय तक रहे।
- तेज़ बुखार या रक्तस्राव।
- यदि कोई बच्चा या बूढ़ा व्यक्ति बहुत कमज़ोर हो जाए।
- उल्टी भी लगातार हो रही हो।
अस्वीकरण: प्रदान की गई जानकारी इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।
