साइलेंट लिवर डैमेज: अगर हमारे शरीर में कोई एक अंग है जो सबसे ज़्यादा काम करता है, लेकिन जिस पर सबसे कम ध्यान दिया जाता है, तो वह है ‘लिवर’। इसे शरीर का ‘साइलेंट वॉरियर’ भी कहा जाता है, जो हर पल विषाक्त पदार्थों को छानने, मेटाबॉलिज़्म को संतुलित करने और बीमारियों से बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी, तेज़ी से बढ़ते शराब के सेवन और गलत खान-पान ने लिवर को आज बहुत बड़े खतरे में डाल दिया है।
अब इस दिशा में एक राहत भरी खबर है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सेठी ने लिवर को स्वस्थ रखने का एक बेहद आसान और कारगर नुस्खा बताया है। डॉ. सेठी के अनुसार, सिर्फ़ दो आदतों को अपनाकर लिवर को लंबे समय तक सुपरफिट रखा जा सकता है और बीमारियों से बचाया जा सकता है। लिवर की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है।डॉ. सेठी के अनुसार, लिवर की समस्याएँ अचानक नहीं होतीं। एक प्रक्रिया है जिसमें पहले फैटी लिवर होता है, फिर सूजन यानी हेपेटाइटिस और धीरे-धीरे यह स्थिति सिरोसिस में बदल सकती है, जो लिवर फेलियर की शुरुआत है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में कभी भी कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। जब बीमारी का पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।पहली ज़रूरी आदत: शराब से परहेज़ करें डॉ. सेठी के अनुसार, शराब लिवर के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है। अगर आप ज़्यादा शराब नहीं पीते, तो भी रोज़ाना थोड़ी सी शराब भी लिवर पर धीमे ज़हर की तरह असर कर सकती है। शराब शरीर में जाकर एसीटैल्डिहाइड बनाती है, जिससे लिवर की कोशिकाओं में सूजन और निशान पड़ जाते हैं। इसके कारण लिवर की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।एक और ज़रूरी आदत: मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में सुधार लिवर का स्वास्थ्य सिर्फ़ शराब से ही नहीं, बल्कि मेटाबॉलिक स्वास्थ्य यानी शुगर लेवल, वज़न, शारीरिक गतिविधि और खान-पान से भी जुड़ा है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, मीठे पेय पदार्थ, शारीरिक निष्क्रियता और पेट के आसपास चर्बी का जमा होना, ये सभी नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (NAFLD) के प्रमुख कारण हैं।लिवर को स्वस्थ रखने के तरीके स्वस्थ डॉ. सेठी के अनुसार, जूस डिटॉक्स या महंगे स्वास्थ्य उत्पादों की कोई ज़रूरत नहीं है। लिवर को स्वस्थ रखने के लिए कुछ बेहद आसान लेकिन कारगर उपाय किए जा सकते हैं, जैसे:
चीनी और प्रसंस्कृत कार्बोहाइड्रेट – जैसे सफेद ब्रेड, मैदा, बेकरी उत्पाद, आदि का सेवन कम करें।
रोज़ाना लगभग 30 मिनट टहलें या व्यायाम करें
वज़न नियंत्रण में रखें – सिर्फ़ 5-10% वज़न कम करने से फैटी लिवर में सुधार हो सकता है।
पर्याप्त नींद लें और तनाव से बचें – नींद और तनाव लिवर पर बहुत बुरा असर डालते हैं।
जूस क्लींजिंग या डिटॉक्स ट्रेंड से बचें – ये ज़रूरी नहीं हैं, लेकिन संतुलित आहार ज़्यादा मददगार होता है।
लिवर की देखभाल अब सबकी ज़िम्मेदारी है। लिवर अब सिर्फ़ शराब पीने वालों या हेपेटाइटिस से पीड़ित लोगों की ही चिंता का विषय नहीं रह गया है। आज की भागदौड़ भरी, तनावपूर्ण और निष्क्रिय जीवनशैली में, सभी को अपने लिवर पर ध्यान देना चाहिए।यह बीमारी खासकर युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में तेज़ी से बढ़ रही है। अगर समय रहते इन दो आदतों को अपनाया जाए, शराब से परहेज़ और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए, तो लिवर को लंबे समय तक ‘सुपरफिट’ रखा जा सकता है।अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।