आज के समय में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है। अक्सर सुनने में आता है कि लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त रहते हुए हार्ट अटैक का शिकार हो जाते हैं और मौके पर ही उनकी मौत हो जाती है। कई बार तो मरीज़ अस्पताल पहुँचते-पहुँचते दम तोड़ देता है।
ऐसी स्थिति में अगर मरीज़ को अस्पताल पहुँचने के 2 मिनट के अंदर उचित इलाज मिल जाए, तो उसकी जान बच सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक से होने वाली मौत को काफी हद तक रोका जा सकता है। अगर हार्ट अटैक का पता चल जाए, तो क्या करना चाहिए?
हार्ट अटैक कब होता है?
हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय को ऑक्सीजन और रक्त पहुँचाने वाली धमनियाँ ब्लॉक हो जाती हैं। आमतौर पर यह ब्लॉकेज प्लाक के कारण होता है। जो वसा, कोलेस्ट्रॉल या अन्य पदार्थों के जमने से होता है। जब यह प्लाक फट जाता है, तो यह रक्त को हृदय की मांसपेशियों तक पहुँचने से रोकता है, जिससे दिल का दौरा पड़ता है।
दिल के दौरे के लक्षण
दिल के दौरे के दौरान, व्यक्ति को सीने में दर्द, जकड़न, दबाव और भारीपन महसूस होता है। दिल का दर्द सीने से शुरू होकर बाएँ हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े और पीठ तक फैल सकता है।
दिल का दौरा पड़ने पर क्या करें?
हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, दिल का दौरा पड़ने के बाद धमनियों में थक्का बन जाता है। इस थक्के को तोड़ने के लिए रोगी को तुरंत तीन दवाएँ दी जा सकती हैं। इन तीन दवाओं में डिस्प्रिन, क्लोपिडोग्रेल और कोलेस्ट्रॉल की दवा एटोरवास्टेटिन शामिल हैं।
रोगी को इन 3 दवाओं का मिश्रण दिया जाना चाहिए। धमनी में थक्का तुरंत तोड़ने के लिए 1 डिस्प्रिन, 2 क्लोपिडोग्रेल और 1 एटोरवास्टेटिन टैबलेट को पानी में घोलकर लेना चाहिए या निगल लेना चाहिए।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।
