सदियों पुरानी बवासीर सिर्फ़ 7 दिनों में ठीक हो जाएगी! जानिए बवासीर ठीक करने के घरेलू उपाय…

WhatsApp Group Join Now

बवासीर एक आम लेकिन बेहद दर्दनाक स्वास्थ्य समस्या है। यह रोग मुख्यतः मलाशय या गुदा में सूजन और रक्तस्राव के रूप में प्रकट होता है। लोग अक्सर जानकारी के अभाव, शर्मिंदगी या बेचैनी के कारण बवासीर के इलाज में देरी करते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

बवासीर का समाधान: बवासीर की पहचान और उनके प्रकार -p-il-san-p-rak-r”>बवासीर के प्रकार बवासीर मुख्यतः दो प्रकार की होती है:
  • आंतरिक बवासीर
इसमें गुदा के अंदर की नसें सूज जाती हैं। यह आमतौर पर दर्द रहित होता है, लेकिन मल त्याग के दौरान खून आ सकता है।
  • बाहरी बवासीर
इसमें गुदा के बाहरी हिस्से में सूजन और गांठें बन जाती हैं, जिससे चलने में कठिनाई और असहनीय दर्द होता है।
  • प्रमुख लक्षण: शौच में कठिनाई
  • रक्तस्राव
  • गुदाद्वार के पास सूजन या गांठ
  • सूजन और खुजली
  • बैठने में असुविधा
बवासीर के लिए प्रभावी घरेलू उपचार
1. त्रिफला चूर्ण का सेवन रात को सोते समय गर्म पानी के साथ त्रिफला लेने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और मल मुलायम होता है। इसे बवासीर के इलाज में बहुत प्रभावी माना जाता है।
2. अरंडी का तेल यह तेल सूजन को कम करता है और मलाशय में चिकनाई प्रदान करता है। हर रात एक चम्मच लेने से आराम मिलता है।
3. बर्फ से सिकाई मलाशय क्षेत्र पर बर्फ से सिकाई करने से सूजन और दर्द से तुरंत राहत मिलती है। यह बाहरी बवासीर के इलाज का एक आसान तरीका है।
4. फाइबर युक्त आहार फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे हरी सब्जियाँ, फल, दलिया और साबुत अनाज कब्ज से राहत दिलाते हैं, जिससे बवासीर के लक्षणों में सुधार होता है।
आयुर्वेद में बवासीर के चमत्कारी उपचार –
1. अर्जुन की छाल अर्जुन की छाल रक्त को शुद्ध करती है और बवासीर में रक्तस्राव को रोकने में मदद करती है। इसका काढ़ा बनाकर दिन में दो बार सेवन करने की सलाह दी जाती है।
2. नागकेशर चूर्ण के नियमित सेवन से रक्तस्राव रुकता है और पाचन क्रिया में सुधार होता है। यह बवासीर का एक सिद्ध उपचार है।
3. हरड़, बहेड़ा, आंवला (त्रिफला) यह त्रिकूट त्रिफला न केवल बवासीर बल्कि अन्य पाचन समस्याओं को भी ठीक करता है।
सीर के स्थायी उपचार का आधार -व्यायाम का महत्व रोज़ाना 30 मिनट तक टहलने या योग करने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और मल त्याग आसान होता है।
पानी का सेवन एक व्यक्ति को दिन भर में कम से कम 3 लीटर पानी पीना चाहिए। इससे शरीर हाइड्रेटेड रहता है और कब्ज से बचाव होता है। तेल और मसालेदार भोजन से बचें तेल और मसालों से भरपूर भोजन बवासीर को बढ़ावा देता है। इसलिए हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करें।
दवा की भूमिका: डॉक्टर के पास कब जाएँ?
यदि घरेलू और आयुर्वेदिक बवासीर के उपचार से आराम न मिले, और रक्तस्राव जारी रहे या गांठ बहुत बड़ी हो जाए, तो तुरंत किसी कोलन-रेक्टल सर्जन से परामर्श लें। आधुनिक चिकित्सा में, लेज़र थेरेपी और रबर बैंड लिगेशन जैसे विकल्प उपलब्ध हैं जो बिना सर्जरी के उपचार संभव बनाते हैं।
मानसिक स्थिति और शर्म दूर करें भारत में ज़्यादातर लोग बवासीर जैसी समस्याओं को शर्म से जोड़ते हैं, जिसके कारण वे डॉक्टरी सलाह लेने से कतराते हैं। यह मानसिकता न केवल बीमारी को बढ़ावा देती है, बल्कि अन्य जटिलताओं को भी जन्म देती है। समय पर बवासीर के उपचार को अपनाकर इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। बवासीर एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसे नज़रअंदाज़ करने पर जीवन की गुणवत्ता पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।
बवासीर के उचित उपचार, आयुर्वेदिक और घरेलू उपचार, संतुलित आहार और बेहतर जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से स्थायी राहत पाई जा सकती है। अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।
WhatsApp Group Join Now

Leave a Comment