नए अध्ययन में खुलासा; डायबिटीज की दवा से कम नहीं हैं बादाम, जानें कब और कितना करें सेवन…

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भारत में रक्त शर्करा की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है। वर्तमान में, लगभग 10.1 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित हैं, जबकि 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज़ की स्थिति में हैं।

अध्ययन में यह भी पता चला है कि एशियाई भारतीयों में प्री-डायबिटीज़ से टाइप 2 मधुमेह में संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। इस समस्या से निपटने के लिए बादाम को एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है।

बादाम में पाया जाने वाला फाइबर, वनस्पति प्रोटीन, मोनोअनसैचुरेटेड वसा और शून्य शर्करा रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। हाल के अध्ययनों ने साबित किया है कि भारत में बादाम का सेवन रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

कई अध्ययनों से पता चला है कि रोज़ाना बादाम खाने से टाइप 2 मधुमेह, प्री-डायबिटीज़, मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में सुधार हो सकता है।

प्री-डायबिटीज़ और किशोरों पर शोध: नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मधुमेह, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन के डॉ. अनूप मिश्रा और उनकी टीम ने हाल ही में दो महत्वपूर्ण अध्ययन किए। यह पाया गया कि बादाम के नियमित सेवन से प्री-डायबिटीज़ और मोटापे से पीड़ित लोगों में रक्त शर्करा नियंत्रण में सुधार होता है।

एक महीने के अध्ययन के दौरान, 23.3% प्रतिभागी प्री-डायबिटीज़ को सामान्य रक्त शर्करा स्तर में बदलने में सक्षम थे। मुंबई में किए गए एक अन्य अध्ययन में किशोरों और युवा वयस्कों को शामिल किया गया था। इसमें पाया गया कि तीन महीने तक प्रतिदिन 56 ग्राम बादाम खाने से उनके रक्त शर्करा, कोलेस्ट्रॉल और सूजन संबंधी संकेतकों में सुधार हुआ।

टाइप 2 मधुमेह और अधिक वजन वाले लोग नई दिल्ली में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि बादाम के सेवन से टाइप 2 मधुमेह वाले व्यक्तियों में रक्त शर्करा नियंत्रण और हृदय स्वास्थ्य दोनों में सुधार हुआ।

इस अध्ययन में लगभग 50 एशियाई भारतीयों को अपनी दैनिक कैलोरी का 20 प्रतिशत बादाम से प्राप्त हुआ। परिणामस्वरूप, उनके रक्त शर्करा और हृदय संबंधी जोखिम कारकों में सकारात्मक परिवर्तन देखे गए।

चेन्नई में किए गए एक अन्य अध्ययन में 352 मोटे व्यक्तियों को शामिल किया गया। एक समूह को 12 हफ़्तों तक रोज़ाना बादाम खाने को कहा गया, जबकि दूसरे समूह को सामान्य आहार दिया गया।

बादाम खाने वाले समूह में रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार देखा गया, जबकि दूसरे समूह में ऐसा कोई बदलाव नहीं देखा गया। निष्कर्ष: इन सभी अध्ययनों से यह स्पष्ट है कि बादाम का सेवन मधुमेह और प्री-डायबिटीज़ को नियंत्रित करने का एक प्रभावी उपाय हो सकता है। भारत।

खासकर एशियाई भारतीयों के लिए, जिनमें मधुमेह के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इसलिए, भारत में जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए बादाम का सेवन बढ़ाना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ और ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।

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